US to seize Iran’s nuclear stockpiles: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है. 28 फरवरी से शुरू हुई यह जंग कई लक्ष्यों के साथ शुरू हुई और बीच-बीच में कई और जुड़ते गए. जोड़ने वाले दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष हैं. पहले- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दूसरे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू. घोषित लक्ष्य क्या हैं? ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसकी परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को समाप्त करना. क्षमता…नहीं. पूरा न्यूक्लियर प्रोग्राम समाप्त करने का इरादा है. पिछले साल जून 2025 में ईरान के तीन न्यूक्लियर फैसेलिटीज पर अमेरिका ने हमला भी किया था, दावा किया सब समाप्त हो गया. लेकिन 8 महीने बाद फिर तीनों देश युद्ध लड़ रहे हैं. इस बार परिस्थिति ज्यादा ही विकट है. खाड़ी क्षेत्र में बदलते हालातों के बीच खबर आ रही है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु सामग्री को अपने कब्जे में लेने के विकल्पों पर रणनीति बना रहा है.
सीबीएस न्यूज ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस तरह की कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. हालांकि, इसकी टाइमिंग अभी तय नहीं है. रिपोर्ट में उसने चर्चा से जुड़े सूत्रों के हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. हालांकि, योजना में अमेरिका की बेहद गुप्त और खास सैन्य इकाई जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) की तैनाती शामिल हो सकती है, जिसे आमतौर पर सबसे संवेदनशील मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
अमेरिका बढ़ा रहा अपनी नौसेना ताकत
अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. इस क्षेत्र में उसके दो एयरक्राफ्ट कैरियर (जंगी जहाज) पहले से ही मौजूद हैं. अब वह यूएसएस बॉक्सर और यूएसएस त्रिपोली को भी यहां पर भेज रहा है. इसके साथ ही 8000 मरीन भी इनके साथ जॉइन करेंगे. बॉक्सर और त्रिपोली दोनों ही एम्फीबियस जहाज हैं, जो समुद्र और जमीन दोनों जगह हमला करने में सक्षम है. जिस तरह अमेरिका ने खार्ग आईलैंड पर अटैक किया और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की चेतावनी दी है, उससे लगता है कि आने वाले समय में अमेरिकी सैनिक ग्राउंड पर भी उतर सकते हैं.
होर्मुज खुलवाने में अमेरिका का सबसे बड़ा निशाना केशम आईलैंड हो सकता है. यह होर्मुज में ईरान का सबसे बड़ा आईलैंड है और सैन्य अड्डा भी. यहां पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन का जखीरा तैनात है. इस जगह पर काफी सारी प्राकृतिक और कृत्रिम गुफाएं भी हैं, ऐसे में अमेरिका इस आईलैंड पर कब्जा करके होर्मुज को खुलवाने का प्रयास कर सकता है. व्हाइट हाउस ने भी ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया है. हालांकि, उसका इशारा खार्ग आईलैंड के लिए था. खार्ग आईलैंड से ईरान अपने कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत सेल करता है. ऐसे में अमेरिका यहां पर कब्जा करके ईरान के ऊपर एक दबाव बनाना चाहेगा.

