काठमांडू / पटना: नेपाल सरकार द्वारा “पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण संबंधी आदेश, 2082 (2025/26)” को नेपाल राजपत्र में अधिसूचित किए जाने के साथ ही पड़ोसी देश में Ethanol Blended Petrol (EBP) कार्यक्रम को औपचारिक विधिक आधार मिल गया है। इस आदेश के अंतर्गत नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत (E10) एथेनॉल मिश्रण का अधिकार प्रदान किया गया है। यह नीतिगत निर्णय — जो दो दशकों की विचार-विमर्श प्रक्रिया के बाद लागू हुआ है — न केवल नेपाल के ऊर्जा सुरक्षा परिदृश्य को बदलने वाला है, बल्कि बिहार के संकटग्रस्त ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरी क्षेत्र के लिए एक सुपरिभाषित निर्यात बाज़ार का द्वार भी खोलता है।
नेपाल की EBP नीति — तकनीकी एवं वाणिज्यिक संरचना
नेपाल के इस आदेश की कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी एवं संरचनात्मक विशेषताएँ हैं जिन्हें समझना आवश्यक है।
फीडस्टॉक पात्रता:आदेश के अनुसार मोलासेस, नेपियर घास, कृषि एवं वन-आधारित जैव अपशिष्ट, मक्का, कसावा और क्षतिग्रस्त अनाज को एथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमोदित कच्चे माल के रूप में मान्यता दी गई है। खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से खाद्य योग्य अनाज के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा।
गुणवत्ता मानक: Fuel-grade Anhydrous Ethanol की न्यूनतम शुद्धता 99.5% (v/v) अनिवार्य होगी। प्रत्येक टैंकर की खरीद से पूर्व NOC द्वारा स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। उत्पादक इकाइयों को अपनी इन-हाउस प्रयोगशाला के माध्यम से भी नियमित quality assurance सुनिश्चित करनी होगी।
खरीद संरचना: NOC को एकमात्र authorized off-taker नामित किया गया है। कोई भी निजी संस्था, व्यक्ति या सरकारी एजेंसी सीधे एथेनॉल नहीं खरीद सकेगी। यह centralized single-buyer मॉडल भारत के OMC-आधारित EBP ढाँचे के समान है — जो बिहार के उत्पादकों के लिए एक परिचित और परीक्षित व्यावसायिक संरचना है।
मूल्य निर्धारण:एथेनॉल का मूल्य प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में एक सरकारी समिति की अनुशंसा पर निर्धारित होगा और प्रतिवर्ष 17 जुलाई (श्रावण 1) से प्रभावी होगा।
माँग-आपूर्ति अंतराल — बिहार के लिए अवसर का परिमाण
नेपाल की वार्षिक पेट्रोल खपत लगभग 730 मिलियन लीटर (73 करोड़ लीटर) है। E10 मिश्रण लागू होने पर वार्षिक एथेनॉल आवश्यकता लगभग 73 मिलियन लीटर अर्थात् प्रतिदिन लगभग 200 किलोलीटर (KL) होगी।
वर्तमान में नेपाल की घरेलू चीनी मिलें NOC को मात्र 50 KL प्रतिदिन की आपूर्ति करने में सक्षम हैं। यह घरेलू आपूर्ति कुल आवश्यकता का मात्र 25 प्रतिशत है। शेष 150 KL प्रतिदिन — अर्थात् वार्षिक लगभग 54.75 मिलियन लीटर — का अंतराल बाह्य स्रोतों से भरना होगा। यह वह structural demand gap है जो बिहार के लिए एक दीर्घकालिक, स्थिर और सरकार-समर्थित निर्यात बाज़ार का आधार बनता है।
बिहार की डिस्टिलरी क्षमता — संकट में, परंतु निर्यात के लिए पूर्णतः सक्षम
बिहार में ESY 2021-22 से आरंभ हुए LTOA (Long Term Offtake Agreement) कार्यक्रम के तहत 22 एथेनॉल इकाइयाँ स्थापित की गईं — 14 dedicated grain-based (मक्का एवं अन्य अनाज) और 8 molasses-based। इन इकाइयों की सम्मिलित स्थापित वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 100 करोड़ लीटर से अधिक है।
परंतु ESY 2025-26 में OMC द्वारा national tender में बिहार के LTOA संयंत्रों को आवंटित मात्रा उनकी स्थापित क्षमता के मात्र 40-50 प्रतिशत तक सीमित रह गई। नवंबर 2025 से प्रभावी इस कटौती ने संयंत्रों को गंभीर financial distress में धकेल दिया। बैंक ऋण सेवा पर दबाव, variable cost recovery में विफलता और fixed overhead का बोझ — ये सब मिलकर कई इकाइयों को prolonged shutdown की स्थिति में ले आए हैं।
बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्वयं विधानसभा में स्वीकार किया —“एथेनॉल संयंत्र बंद होने के कगार पर हैं। यदि ये बंद हुए तो रोज़गार पर सीधा असर पड़ेगा।”
उद्योग विशेषज्ञ की राय — “यह structural solution है”
बिहार एथेनॉल एसोसिएशन के महासचिव एवं एथेनॉल नीति विशेषज्ञ CA कुणाल किशोर ने नेपाल के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा —
“नेपाल का यह EBP आदेश बिहार के grain-based distillery क्षेत्र के लिए केवल एक व्यावसायिक अवसर नहीं, बल्कि एक structural solution है। बिहार में स्थापित उत्पादन क्षमता, अनुभवी तकनीकी जनशक्ति, 99.5% anhydrous ethanol उत्पादन की सिद्ध क्षमता और नेपाल सीमा से भौगोलिक निकटता — ये सभी कारक बिहार को NOC का सबसे competitive और reliable supplier बनाते हैं। आवश्यकता है कि भारत और नेपाल के बीच एक formal bilateral ethanol trade framework स्थापित हो, जिसमें FSSAI और NOC के quality standards का harmonization हो, EXIM policy के अंतर्गत ethanol को priority export commodity का दर्जा मिले और बिहार एथेनॉल एसोसिएशन को NOC के साथ direct procurement negotiations की अनुमति दी जाए। यदि यह window समय रहते भुनाई गई, तो बिहार के संयंत्र न केवल अपनी financial viability पुनः प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर सकते हैं।”
भौगोलिक एवं लॉजिस्टिक लाभ
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज — नेपाल सीमा से सटे इन जिलों में स्थित एथेनॉल संयंत्रों की NOC के निकटतम depot तक transportation distance न्यूनतम होगी। Tanker logistics, road connectivity और border trade infrastructure पहले से स्थापित है। यह logistics advantage बिहार के एथेनॉल को नेपाल बाज़ार में landed cost के आधार पर अत्यंत प्रतिस्पर्धी बनाता है।
नीतिगत सिफारिशें
इस अवसर के दोहन के लिए निम्नलिखित कदम अपेक्षित हैं — भारत-नेपाल के मध्य ethanol को bilateral trade agreement के अंतर्गत सम्मिलित किया जाए; DGFT द्वारा fuel-grade anhydrous ethanol के निर्यात हेतु simplified clearance mechanism स्थापित हो; NOC और बिहार एथेनॉल एसोसिएशन के मध्य quality protocol harmonization की प्रक्रिया आरंभ हो; तथा सीमावर्ती जिलों में ethanol storage और blending infrastructure के लिए राज्य सरकार विशेष प्रोत्साहन प्रदान करे।
निष्कर्ष
नेपाल का EBP आदेश 2082 एक ऐसे समय आया है जब बिहार के एथेनॉल क्षेत्र को एक alternate, stable और government-backed offtake channel की आवश्यकता है। यह अवसर क्षणिक नहीं है — यह एक दीर्घकालिक structural demand है। बिहार की grain-based distilleries के पास क्षमता है, गुणवत्ता है, और भौगोलिक लाभ भी है। केवल एक सुविचारित नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
नेपाल का दरवाज़ा खुल चुका है। अब प्रश्न यह है कि बिहार इस अवसर का उपयोग करता है — या प्रतीक्षा में एक और वर्ष गँवा देता है।

