नेपाल की राजनीति में एक नया और अनोखा अध्याय जुड़ गया है। 35 वर्षीय बालेंद्र “बालेन” शाह ने बेहद कम प्रचार के बावजूद देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचकर सबको चौंका दिया है।
जहां आमतौर पर चुनावों में बड़े-बड़े नेता दर्जनों रैलियां और घंटों भाषण देते हैं, वहीं बालेन शाह ने पूरे चुनाव अभियान में सिर्फ 5 रैलियां कीं और कुल मिलाकर लगभग 26 मिनट ही जनता को संबोधित किया। इसके बावजूद उनकी पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली।
बालेन शाह की लोकप्रियता पारंपरिक राजनीति से नहीं, बल्कि उनके अलग अंदाज और युवाओं से सीधे जुड़ाव से आई। वे पहले एक रैपर और इंजीनियर के रूप में जाने जाते थे, फिर काठमांडू के मेयर बने और अब देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), ने हालिया चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए संसद की 275 में से करीब 182 सीटें जीत लीं।
बालेन शाह का उदय नेपाल में बदलाव की मांग और खासकर युवाओं की नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। 2025 में हुए बड़े जनआंदोलन और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को कमजोर कर दिया, जिसका फायदा उन्हें मिला।
कम बोलने, ज्यादा काम करने और सिस्टम के खिलाफ साफ छवि ने उन्हें जनता का भरोसा दिलाया। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है—देश की आर्थिक स्थिति सुधारना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना।

