Bihar की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित इस्तीफे और राज्यसभा जाने की खबरों ने सियासी हलचल को तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 30 मार्च को वे विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं।
दिल्ली जाने की तैयारी, राज्यसभा का गणित
नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार:
- संसद सदस्य बनने के बाद 14 दिनों में राज्य की सदस्यता छोड़ना जरूरी
- नहीं छोड़ने पर राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है
ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार जल्द ही दिल्ली जाकर राज्यसभा की शपथ लेंगे।
नया मुख्यमंत्री कौन? NDA में मंथन जारी
अब सबसे बड़ा सवाल है—बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार:
- NDA की बैठक में नए CM के नाम पर अंतिम फैसला होगा
- ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी कहा कि 9 अप्रैल तक इंतजार करना होगा
👉 लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की है, वह है: Samrat Choudhary
कहा जा रहा है कि हाल के दिनों में नीतीश कुमार ने सार्वजनिक मंचों पर उन्हें ज्यादा महत्व दिया है।
14 अप्रैल के बाद हो सकता है बड़ा ऐलान
सूत्रों के मुताबिक:
- ‘खरमास’ खत्म होने के बाद यानी 14 अप्रैल के बाद
- नई सरकार और कैबिनेट गठन की संभावना
इस दौरान NDA के भीतर सहमति बनाकर नए नेतृत्व का ऐलान किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है इस्तीफा? समझिए नियम
संविधान के अनुसार:
- कोई व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता
- इसे “Dual Representation” से बचने के लिए बनाया गया नियम
नीतीश कुमार करीब 20 वर्षों तक विधान परिषद सदस्य रहे हैं और अब वे राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभा सकते हैं।
बिहार की राजनीति में नए अध्याय के संकेत
नीतीश कुमार का यह कदम:
- राज्य की राजनीति में एक युग के अंत का संकेत
- NDA के भीतर नई शक्ति संतुलन की शुरुआत
- और नए नेतृत्व के साथ नई रणनीति का रास्ता खोल सकता है
निष्कर्ष
फिलहाल बिहार की सियासत में सस्पेंस चरम पर है।
क्या नीतीश कुमार अपने उत्तराधिकारी का नाम जल्द घोषित करेंगे?
या NDA बैठक के बाद ही तस्वीर साफ होगी—इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

