बिहार की राजनीति में नए वित्तीय वर्ष से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद 19 समितियों का गठन कर दिया गया है।
नई समितियों का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक रहेगा। सूची जारी होते ही सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
धूमल, फैसल और मनोहर को बड़ी जिम्मेदारी
इस बार कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं:
- 🏞️ मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल – पर्यटन उद्योग समिति के चेयरमैन
- 🧾 फैसल रहमान – गैर सरकारी विधेयक समिति के चेयरमैन
- 📜 मनोहर प्रसाद सिंह – प्रत्यायुक्त विधान समिति के चेयरमैन
- 🌱 अनंत सिंह – प्रदूषण समिति में अहम भूमिका
👉 खास बात:
राज्यसभा चुनाव में अलग रुख अपनाने वाले नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है।
सबसे ताकतवर समितियां स्पीकर के पास
कुछ अहम समितियों की कमान खुद स्पीकर प्रेम कुमार के पास रहेगी:
- नियम समिति
- सामान्य प्रयोजन समिति
इनमें शामिल प्रमुख सदस्य:
- सम्राट चौधरी
- विजय कुमार सिन्हा
- विजय कुमार चौधरी
अन्य समितियों का गठन
📌 पुस्तकालय और याचिका समिति
- अध्यक्ष: ज्योति देवी
- याचिका समिति: जनक सिंह
📌 प्रश्न और पंचायत समिति
- अध्यक्ष: अमरेंद्र कुमार पांडेय
- जिला परिषद समिति: शैलेश मंडल
📌 महिला और कल्याण समिति
- महिला एवं बाल विकास: अश्वमेध देवी
- एससी-एसटी कल्याण: संतोष निराला
राजनीतिक संतुलन का संकेत
इस गठन से साफ संकेत मिलते हैं:
- सत्ता और विपक्ष दोनों को जगह
- बागी नेताओं को भी मौका
- राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश
“समितियों का यह गठन सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का हिस्सा भी है।”
क्यों है यह फैसला अहम?
- विधानसभा में शक्ति संतुलन तय करेगा
- विधायी कार्यों की दिशा तय होगी
- आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर असर
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा की नई समितियां यह दिखाती हैं कि राजनीति में हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
👉 अब देखना होगा कि इन समितियों के जरिए कौन नेता अपनी पकड़ मजबूत करता है और आने वाले समय में सियासी समीकरण कैसे बदलते हैं।

