बिहार में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई उड़ान देने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने पटना के नंदलाल छपरा में अपना रीजनल ऑफिस खोलने का बड़ा फैसला लिया है।
इस कदम से न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत के मछली पालकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
5.68 एकड़ में बनेगा आधुनिक फिशरीज हब
पटना के नंदलाल छपरा इलाके में:
- 5.68 एकड़ जमीन का चयन हो चुका है
- यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस केंद्र बनेगा
- यह केंद्र “नॉलेज और ट्रेनिंग हब” के रूप में काम करेगा
👉 इससे बिहार में मत्स्य पालन की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अप्रैल के अंत से शुरू होगा काम
सरकारी जानकारी के अनुसार:
- अप्रैल के अंतिम सप्ताह से अस्थायी कार्यालय काम शुरू करेगा
- शुरुआत में यह पटना के मत्स्य विकास भवन से संचालित होगा
- केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति के बाद यह फैसला लिया गया
“अब योजनाओं की मॉनिटरिंग सीधे पटना से होगी” — विभागीय अधिकारी
सब्सिडी और योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
इस केंद्र के शुरू होने से:
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और
- पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना
जैसी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।
- सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जाएगी
- फंड मिलने में देरी कम होगी
- पारदर्शिता बढ़ेगी
लैब से तालाब तक पहुंचेगी नई तकनीक
बिहार में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया जाएगा:
- बायोफ्लॉक तकनीक का विस्तार
- वैज्ञानिक तरीके से ‘चौर’ (दलदली क्षेत्र) का उपयोग
- उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज और फीड की स्थानीय उपलब्धता
👉 इससे लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
पूर्वी भारत के लिए बनेगा बड़ा सेंटर
यह केंद्र सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा।
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
के किसान और अधिकारी भी यहां ट्रेनिंग ले सकेंगे।
👉 पटना पूर्वी भारत का बड़ा फिशरीज ट्रेनिंग और रिसर्च हब बन सकता है।
क्या बदलेगा बिहार में?
- मछली उत्पादन में तेजी
- रोजगार के नए अवसर
- किसानों की आय में वृद्धि
- बिहार का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थान

