सुधा दूध खरीद रेट में बढ़ोतरी, अब पशुपालकों को मिलेगा ज्यादा पैसा

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Saaf Baatein
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Sudha Milk Price Hike New Milk Purchase Rate Chart Bihar
Sudha Milk Price Hike New Milk Purchase Rate Chart Bihar (PC: Social Media Sites)

Sudha Milk Price Hike: Bihar State Milk Co-operative Federation Limited ने दूध उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी है. बाजार में दूध की कीमत बढ़ाने के बाद अब सुधा ने दूध खरीद दरों में भी इजाफा कर दिया है. नई दरों के तहत पशुपालकों को फैट के हिसाब से 1.75 रुपये से लेकर 3.93 रुपये तक ज्यादा भुगतान मिलेगा.

नई खरीद दरें 25 जून 2026 से लागू होंगी. समस्तीपुर समेत सभी दुग्ध संग्रह केंद्रों पर नया रेट चार्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को समय पर जानकारी मिल सके.

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

मिथिला मिल्क यूनियन के अनुसार सबसे कम 3.0 फैट वाले दूध की कीमत अब 33 रुपये से बढ़ाकर 34.75 रुपये कर दी गई है. वहीं 10 प्रतिशत फैट वाले उच्च गुणवत्ता दूध का अधिकतम रेट 77.70 रुपये से बढ़ाकर 81 रुपये कर दिया गया है.

सहायक प्रबंधक भगवत दयाल ने बताया कि नई दरों से दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा और सभी कलेक्शन सेंटर पर नई सूची उपलब्ध करा दी गई है.

कैसे होगी दूध की खरीद?

दूध खरीद की प्रक्रिया पहले की तरह डबल एक्सिस और सिंगल एक्सिस प्रणाली पर आधारित रहेगी.

  • 3% से 5.9% फैट वाले दूध का भुगतान फैट और SNF दोनों के आधार पर होगा
  • 6% या उससे अधिक फैट वाले दूध का भुगतान केवल फैट के आधार पर किया जाएगा

नई व्यवस्था के अनुसार:

  • प्रति किलो फैट दर: 417 रुपये
  • प्रति किलो SNF दर: 278 रुपये
  • 6% से अधिक फैट वाले दूध पर प्रति किलो फैट दर: 818.23 रुपये

नया दूध खरीद रेट चार्ट

फैटपुराना रेटनया रेटबढ़ोतरी
3.033.00-34.3234.75-36.031.75-1.82
4.036.96-38.2838.92-40.311.96-2.03
5.040.92-42.2443.09-44.482.17-2.24
6.045.22-46.6247.62-48.652.03-2.40
7.052.76-54.3955.56-56.992.60-2.80
8.060.30-62.1663.49-65.463.19-3.30
9.067.83-69.9371.43-73.902.97-3.60
10.075.37-77.7079.30-81.003.30-3.93

पशुपालकों और उपभोक्ताओं दोनों पर असर

हाल ही में सुधा ने बाजार में दूध के खुदरा दाम भी बढ़ाए थे. अब खरीद दर बढ़ने से जहां किसानों की आमदनी बढ़ेगी, वहीं डेयरी सेक्टर में लागत संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी.

माना जा रहा है कि पशुचारा, ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है.

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