Mahua Moitra Controversy: पशु हत्या पर पोस्ट के बाद तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा कानूनी विवाद में घिरीं

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Saaf Baatein
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Mahua Moitra Fir Facebook Post Animal Slaughter Controversy
Mahua Moitra Fir Facebook Post Animal Slaughter Controversy (PC: Social Media Sites)

Mahua Moitra: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. पश्चिम बंगाल के करीमपुर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. भाजपा नेताओं ने उन पर भड़काऊ टिप्पणी करने और सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश का आरोप लगाया है.

फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद 16 मई को महुआ मोइत्रा के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ. वीडियो में उन्होंने राज्य सरकार के हालिया गौहत्या संबंधी दिशा-निर्देशों पर सवाल उठाए थे. महुआ ने आरोप लगाया था कि ये नियम जानबूझकर बनाए गए हैं और एक विशेष वर्ग को खुश करने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि इन फैसलों से पशु व्यापारियों और गौहत्या से जुड़े लोगों में डर का माहौल बन गया है. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और गोमांस निर्यात से जुड़ी सब्सिडी को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा.

भाजपा नेता ने दर्ज कराई शिकायत

स्थानीय भाजपा नेता गोलक बिश्वास ने करीमपुर पुलिस स्टेशन में महुआ मोइत्रा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सांसद ने अपने बयान से सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

भाजपा विधायक ने किया पलटवार

करीमपुर से भाजपा विधायक समरेंद्र नाथ घोष ने महुआ मोइत्रा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी निर्देशों में कहीं भी पशु बाजार बंद करने की बात नहीं कही गई है. उन्होंने कहा कि ये कदम भारत-बांग्लादेश सीमा पर गायों की तस्करी रोकने के लिए उठाए गए हैं.

भाजपा विधायक ने यह भी मांग की कि यह जांच होनी चाहिए कि कहीं तस्करों को राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिल रहा है.

पहले से जारी है राजनीतिक तनातनी

महुआ मोइत्रा और भाजपा नेताओं के बीच विवाद पहले से ही चल रहा है. इससे पहले भाजपा नेता गोलक बिश्वास ने सोशल मीडिया पर महुआ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ महुआ मोइत्रा ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

अब एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गया है. सीमा से सटे करीमपुर इलाके में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है. स्थानीय नेताओं का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में नेताओं को बयानबाजी से बचना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर तनाव न बढ़े.

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