पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए जाने के मुद्दे पर एक बार फिर कोर्ट जाने का ऐलान किया है।
हुगली जिले में आयोजित रैलियों में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
“लोकतंत्र में वोटर लिस्ट फ्रीज कैसे?”
ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा:
“जब लोग वोट ही नहीं डाल पाएंगे, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा?”
- अक्टूबर 2025 में कुल 7.66 करोड़ मतदाता थे
- इनमें से करीब 90.83 लाख नाम हटाए गए
- TMC अब इस मुद्दे पर फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी
👉 उन्होंने कहा कि संविधान के तहत सभी नाम वापस जोड़ने की कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
- आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप
- लोगों को फोन कर धमकाने का दावा
- वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप
👉 इन आरोपों से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
“BJP को वोट दिया तो छूट जाएगा मछली-भात”
बालागढ़ की रैली में ममता बनर्जी ने सांस्कृतिक मुद्दा उठाते हुए कहा:
“अगर भाजपा सत्ता में आई, तो बंगाल की पहचान और खान-पान पर असर पड़ेगा।”
- मछली, मांस खाने पर रोक का आरोप
- बांग्ला भाषा और संस्कृति पर खतरे की बात
👉 इस बयान से चुनावी माहौल में ‘अस्मिता’ का मुद्दा और मजबूत हो गया है।
बंगाल विभाजन की साजिश का दावा
श्रीरामपुर की सभा में ममता बनर्जी ने परिसीमन (Delimitation) को लेकर भी हमला बोला।
- भाजपा पर बंगाल को बांटने की साजिश का आरोप
- नए राज्य बनाने की योजना का दावा
- “किसी भी कीमत पर बंगाल का बंटवारा नहीं होने देंगे”
चुनाव से पहले तेज हुआ सियासी संग्राम
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले:
- वोटर लिस्ट विवाद बड़ा मुद्दा बन गया है
- TMC और BJP के बीच सीधी टक्कर
- कोर्ट में जाने से मामला और गरमा सकता है
👉 आने वाले दिनों में यह विवाद चुनावी रणनीति का केंद्र बन सकता है।

