नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते संकट के बीच भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बड़ा बैकअप प्लान तैयार किया है। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैश्विक ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी संघर्ष ने दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने इस स्थिति से निपटने के लिए सात नए ग्रुप गठित करने की बात कही। वहीं, उनके बयान के बाद भारत ने तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेज़ी से कदम उठाए हैं।
रूस से बड़ी डील, संकट में राहत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की बड़ी खरीदारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अप्रैल डिलीवरी के लिए करीब 6 करोड़ बैरल तेल बुक किया है। यह सौदा ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर किया गया है।
भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा खरीदी गई यह मात्रा देश की मौजूदा मासिक जरूरत के बराबर है और फरवरी की तुलना में दोगुनी से अधिक है। इससे देश में तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
होर्मुज संकट का असर
फारस की खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के चलते बड़ी संख्या में ऑयल और एलपीजी टैंकर फंसे हुए हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
अमेरिका की छूट और भारत की रणनीति
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेल खरीद को लेकर कुछ छूट दिए जाने के संकेत दिए थे। इसके बाद भारत ने अपने पुराने सहयोगी रूस की ओर रुख करते हुए बड़े पैमाने पर तेल खरीदने का फैसला किया।
भारत, जो आयातित कच्चे तेल पर काफी निर्भर है, ने 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से तेल खरीद बढ़ाई थी। हालांकि, पिछले साल अमेरिकी दबाव के चलते इसमें कमी आई थी।
अन्य स्रोतों की भी तलाश
रूस के अलावा भारत अब वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि अप्रैल में वेनेजुएला से करीब 80 लाख बैरल कच्चा तेल आएगा, जो अक्टूबर 2020 के बाद सबसे अधिक होगा।
रिफाइनरियों की वापसी
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और हिंदुस्तान मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियां, जिन्होंने दिसंबर से रूसी तेल से दूरी बना ली थी, अब फिर से खरीदारी में सक्रिय हो गई हैं।
रूस को भी बड़ा फायदा
इस बीच बढ़ती मांग और ऊंची कीमतों के कारण रूस को भी बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है। क्रेमलिन को कच्चे तेल के निर्यात से मार्च 2022 के बाद से सबसे अधिक मुनाफा मिल रहा है।
कुल मिलाकर, भारत की यह रणनीति दिखाती है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी और मजबूत योजना तैयार कर ली है।

