ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के 26वें दिन पश्चिम एशिया में तनाव और गहराता नजर आ रहा है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर शांति की पहल करते हुए ईरान के सामने 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना रखी है। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह फिलहाल संघर्ष जारी रखेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस शांति योजना में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका भी सामने आई है। पाकिस्तान ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उसने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और हालात तेजी से बदल रहे हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया बेहद सख्त रही है। ईरानी मिलिट्री के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाकारी ने अमेरिकी दावों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि अमेरिका खुद से ही बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या वॉशिंगटन के अंदरूनी मतभेद इस हद तक बढ़ चुके हैं कि वह वास्तविक संवाद के बजाय केवल दावे कर रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से यह दावा किया गया है कि वह ईरान के एक शीर्ष नेता के संपर्क में है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि वह ईरान के सर्वोच्च नेता नहीं हैं। इस दावे ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है, क्योंकि ईरान की ओर से ऐसे किसी संवाद की पुष्टि नहीं की गई है।
दूसरी ओर, इजरायल की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली अधिकारी इस युद्धविराम प्रस्ताव से हैरान हैं और फिलहाल सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग और रणनीति में भी मतभेद मौजूद हैं।
सैन्य स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो रही हैं। अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी कर रही है। पहले से ही हजारों सैनिक वहां मौजूद हैं, और नई तैनाती से यह संख्या और बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर शांति की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा। कूटनीतिक प्रयास और सैन्य रणनीतियां साथ-साथ चल रही हैं, लेकिन फिलहाल किसी ठोस समाधान के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

