पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान अब खुद को एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुट गया है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे तीन प्रभावशाली देशों को इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
इस्लामाबाद में होगी हाई-लेवल बैठक
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक इस्लामाबाद में आयोजित की जाएगी, जिसमें मुख्य फोकस होगा:
- क्षेत्रीय तनाव को कम करना
- युद्ध को रोकने के रास्ते तलाशना
- वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर को नियंत्रित करना
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
पाकिस्तान क्यों बनना चाहता है ‘बिचौलिया’?
पाकिस्तान की इस पहल के पीछे कई रणनीतिक कारण माने जा रहे हैं:
- खुद को शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करना
- अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभाना
- खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्ताव और संदेश पहुंचाने का काम कर चुका है।
‘इस्लामिक NATO’ जैसी चर्चा भी तेज
इस बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी चर्चा शुरू हो गई है—
क्या मुस्लिम देशों का कोई बड़ा सुरक्षा गठबंधन (Islamic NATO) बन सकता है?
- सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों की मौजूदगी
- संयुक्त रणनीति पर विचार
इन सबने इस संभावना को और मजबूत किया है।
जंग से बढ़ा वैश्विक खतरा
ईरान-इजरायल संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है:
- हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर हमला किया
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित
- तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर
इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है।
क्या सफल होगी पाकिस्तान की कोशिश?
हालांकि पाकिस्तान की कोशिशें तेज हैं, लेकिन:
- ईरान ने कई प्रस्तावों को एकतरफा बताया है
- अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत अभी नहीं हो रही
- जमीन पर संघर्ष लगातार जारी है
ऐसे में यह देखना अहम होगा कि यह कूटनीतिक पहल शांति की दिशा में कितनी असरदार साबित होती है।
निष्कर्ष
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान की यह पहल उसे वैश्विक कूटनीति में नई भूमिका दिला सकती है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह बातचीत जंग को रोकने में कोई ठोस नतीजा दे पाती है या नहीं।

